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Deen Dayal Upadhyaya Quotes in Hindi

Deen Dayal Upadhyaya Quotes

Deen Dayal Upadhyaya is founder of Bhartiya Janta Party, He was one of the most important leaders of the Bharatiya Jana Sangh, the forerunner of the present day Bharatiya Janata Party. Upadhyaya conceived the political philosophy Integral Humanism – the guiding philosophy of the Bharatiya Janata Party. Many people are finding his Deen Dayal Upadhyaya Quotes in Hindi, Deen Dayal Upadhyaya Hindi Quotes. Following are latest hindi quotes, suvichar in hindi.

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Deen Dayal Upadhyaya Quotes in Hindi

Deen Dayal Upadhyaya Quotes in Hindi

  • एक देश लोगों का समूह है जो ‘एक लक्ष्य ’, ‘एक आदर्श ’, एक मिशन ‘ के साथ जीते हैं , और धरती के एक टुकड़े को मात्रभूमि के रूप में देखते हैं . यदि आदर्श या मात्रभूमि – इन दोनों में से एक भी नहीं है तो देश का कोई अस्तित्व नहीं है.
  • The basic cause of the problems facing Bharat is the neglect of Its ‘National Identity.
  • यहाँ भारत में , हमने अपने समक्ष मानव के समग्र विकास के लिए शरीर , मन , बुद्धि और आत्मा की आवश्यकताओं की पूर्ती करने की चार -स्तरीय जिम्मेदारियों का आदर्श रखा है.
  • Human Knowledge is common property.
  • किसी सिद्धांत को ना मानने वाले अवसरवादी हमारे देश की राजनीति नियंत्रित करते हैं.
  • एक बीज , जड़ों , तानों , शाखाओं , पत्तियों , फूलों और फलों के रूप में अभिवयक्त होता है . इन सभी के अलग -अलग रूप , रंग और गुण होते हैं . फिर भी हम बीज के माध्यम से उनकी एकता के सम्बन्ध को पहचानते हैं.
  • हम लोगों ने अंग्रेजी वस्तुओं का विरोध करने में तब गर्व महसूस किया था जब वे (अंग्रेज ) हम पर शाशन करते थे , पर हैरत की बात है , अब जब अंग्रेज जा चुके हैं , पश्चिमीकरण प्रगति का पर्याय बन चुका है.
  • नैतिकता के सिद्धांत किसी के द्वारा बनाये नहीं जाते , बल्कि खोजे जाते हैं.
  • Unity in diversity and the expression of unity in various forms has remained the thought of Bhartiya Culture.
  • Here in Bharat, we have placed before ourselves the ideal of the four fold responsibilities of catering to the needs of Body, Mind, Intellect and Soul with a view to achieve the integrated progress of Man.
  • स्वतंत्रता तभी सार्थक हो सकती है यदि वो हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का साधन बन जाए.
  • पिछले एक हज़ार वर्षों में हमने जो भी आत्मसात किया चाहे वो हम पर थोपा गया या हमने स्वेच्छा से अपनाया – उसे अब छोड़ा नहीं जा सकता.
  • वहां जीवन में विविधता और बहुलता है लेकिन हमने हमेशा इसके पीछे की एकता को खोजने का प्रयास किया है.
  • ये  ज़रूरी  है  कि  हम  ‘ हमारी  राष्ट्रीय   पहचान ’ के  बारे  में  सोचें  जिसके  बिना  ‘स्वतंत्रता ’ का  कोई  अर्थ  नहीं  है.
  • Dharma is very wide concept which concerns all aspects of life sustaining the society.
  • अनेकता में एकता और विभिन्न रूपों में एकता की अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति की सोच रही है.
  • एक बीज , जड़ों , तानों , शाखाओं , पत्तियों , फूलों और फलों के रूप में अभिवयक्त होता है . इन सभी के अलग -अलग रूप , रंग और गुण होते हैं . फिर भी हम बीज के माध्यम से उनकी एकता के सम्बन्ध को पहचानते हैं.
  • जब स्वाभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है , तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होते हैं.
  • जब राज्य सभी शक्तियों , दोनों राजनीतिक और आर्थिक का अधिग्रहण कर लेता है , तो इसका परिणाम धर्म का पतन होता है.

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