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Poem in Hindi | Hindi Poems Poetry

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Hindi Poems Poetry

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  • पेहली नज़र में भी प्यार होता है
    दिल का चैन अक्सर यूँ ही खोता है
    अनजानी आँखे जब किसी पे रुक जाती है
    अक्सर दिल के अंदर वोह झाँक जाती है
    धड़कने यूँ ही दिल की बढ़ जाती है
    भीड़ में भी तब किसी की याद सताती है
    चैन दिल का खो जाता है
    बस एक वही चेहरा याद आता है
    दिल का एक अनकहा रिश्ता दिल से जुड़ जाता है
    पेहली नज़र में जब प्यार हो जाता है
    एक पल मे अजनबी दिल का मलिक बन जाता है
    आँखे बस वोह अजनबी आँखे ढूंढ़ती है
    पिया से मिलने का बस वोह बहना ढूंढ़ती है
    जिया को सुकून तब आता है
    जब आँखो के सामने उनका चेहरा आता है
    दिल से दिल का बस एक रिश्ता जुड़ जाता है..
  • Poem in Hindi
  • सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
    देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

    करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,
    देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।

    रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में
    लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।

    यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार
    क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।

    ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
    अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

    वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
    हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

    खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद,
    आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।

    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
    देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

  • बोये जाते हैं बेटे.. पर उग जाती हैं बेटियाँ,
    खाद पानी बेटों को.. पर लहराती हैं बेटियां,
    स्कूल जाते हैं बेटे.. पर पढ़ जाती हैं बेटियां,
    मेहनत करते हैं बेटे.. पर अव्वल आती हैं बेटियां,
    रुलाते हैं जब खूब बेटे.. तब हंसाती हैं बेटियां,
    नाम करें न करें बेटे.. पर नाम कमाती हैं बेटियां,
    जब दर्द देते बेटे.. तब मरहम लगाती बेटियां,
    छोड़ जाते हैं जब बेटे.. तो काम आती हैं बेटियां,
    आशा रहती है बेटों से.. पर पुर्ण करती हैं बेटियां,
    हजारों फरमाइश से भरे हैं बेटे.. पर समय की नज़ाकत को समझती बेटियां,
    बेटी को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर घूर कर देखे…
    किंतु.. बेटी को सूरज जैसा बनाओ ताकि घूरने से पहले सब की नजर झुक जाये.
  • Woh suhane lamhe ab bhulaye nahi jate,
    Yaado k parinde yu hi udaaye nahi jate,

    Woh chhat par aana wo julfe lehrana,
    Sabhi pegaam likhkar bataye nahi jate,

    Woh bahana, saheli k ghar padne jana,
    Gali k chakkar ab aise lagaye nahi jate,

    Wo aangan mein aakar angithi jalana,
    Purane bahane to ab banaye nahi jaate,

    Mohalle ki shadi me saj-sanvar kar jana,
    Humesha toh ye jalwe dikhaye nahi jate,

    Woh kisi kone me chup kar aansu bahana,
    Aise ehsaas toh “Meet” karaye nahi jate.

  • Na thi kisi ki himmat koi aankh na dikhata tha,
    Ab kaha chali gyi hain humari androoni shakti,

    Gila sikhwa dur kar prem ka ban chalana hoga,
    Yahi pegaam hume pahuchana hoga basto basti,

    Hume humare desh ko wahi esthan dilana hoga,
    Humare mein hi hain humare desh ki shakti,

    Hum mein hi hain humare rashtra ki shakti,
    Humari desh bhakti hi hain humari shakti..

  • धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा
    कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा
    कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है
    मुंह को छिपा तिमिर में क्यों तेज सो रहा है
    दाता पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे
    बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे
    प्यारे स्वदेश के हित अँगार माँगता हूँ
    चढ़ती जवानियों का श्रृंगार मांगता हूँ

    बेचैन हैं हवाएँ, सब ओर बेकली है
    कोई नहीं बताता, किश्ती किधर चली है
    मँझदार है, भँवर है या पास है किनारा?
    यह नाश आ रहा है या सौभाग्य का सितारा?
    आकाश पर अनल से लिख दे अदृष्ट मेरा
    भगवान, इस तरी को भरमा न दे अँधेरा
    तमवेधिनी किरण का संधान माँगता हूँ
    ध्रुव की कठिन घड़ी में, पहचान माँगता हूँ

    आगे पहाड़ को पा धारा रुकी हुई है
    बलपुंज केसरी की ग्रीवा झुकी हुई है
    अग्निस्फुलिंग रज का, बुझ डेर हो रहा है
    है रो रही जवानी, अँधेर हो रहा है
    निर्वाक है हिमालय, गंगा डरी हुई है
    निस्तब्धता निशा की दिन में भरी हुई है
    पंचास्यनाद भीषण, विकराल माँगता हूँ
    जड़ताविनाश को फिर भूचाल माँगता हूँ

    मन की बंधी उमंगें असहाय जल रही है
    अरमान आरजू की लाशें निकल रही हैं
    भीगी खुशी पलों में रातें गुज़ारते हैं
    सोती वसुन्धरा जब तुझको पुकारते हैं
    इनके लिये कहीं से निर्भीक तेज ला दे
    पिघले हुए अनल का इनको अमृत पिला दे
    उन्माद, बेकली का उत्थान माँगता हूँ
    विस्फोट माँगता हूँ, तूफान माँगता हूँ

    आँसू भरे दृगों में चिनगारियाँ सजा दे
    मेरे शमशान में आ श्रंगी जरा बजा दे
    फिर एक तीर सीनों के आरपार कर दे
    हिमशीत प्राण में फिर अंगार स्वच्छ भर दे
    आमर्ष को जगाने वाली शिखा नयी दे
    अनुभूतियाँ हृदय में दाता, अनलमयी दे
    विष का सदा लहू में संचार माँगता हूँ
    बेचैन जिन्दगी का मैं प्यार माँगता हूँ

    ठहरी हुई तरी को ठोकर लगा चला दे
    जो राह हो हमारी उसपर दिया जला दे
    गति में प्रभंजनों का आवेग फिर सबल दे
    इस जाँच की घड़ी में निष्ठा कड़ी, अचल दे
    हम दे चुके लहु हैं, तू देवता विभा दे
    अपने अनलविशिख से आकाश जगमगा दे
    प्यारे स्वदेश के हित वरदान माँगता हूँ
    तेरी दया विपद् में भगवान माँगता हूँ..

  • कोशिश कर, हल निकलेगा।
    आज नही तो, कल निकलेगा।

    अर्जुन के तीर सा सध,
    मरूस्थल से भी जल निकलेगा।।

    मेहनत कर, पौधो को पानी दे,
    बंजर जमीन से भी फल निकलेगा।

    ताकत जुटा, हिम्मत को आग दे,
    फौलाद का भी बल निकलेगा।

    जिन्दा रख, दिल में उम्मीदों को,
    गरल के समन्दर से भी गंगाजल निकलेगा।

    कोशिशें जारी रख कुछ कर गुजरने की,
    जो है आज थमा थमा सा, चल निकलेगा।।

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