3 सबसे अच्छा निबंध [बाल दिवस निबंध & महात्मा गांधी निबंध & विद्यालय वार्षिकोत्सव निबंध] - Hindi Quotes

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Friday, May 8, 2020

3 सबसे अच्छा निबंध [बाल दिवस निबंध & महात्मा गांधी निबंध & विद्यालय वार्षिकोत्सव निबंध]


1. बाल दिवस निबंध

हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष 14 नवम्बर को बाल दिवस का आयोजन किया जाता है. बाल दिवस पूज्य चाचा नेहरु का जन्मदिवस है. चाचा नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे. वे स्वतन्त्रता संग्राम के महान सेनानी थे. उन्होंने अपने देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया. अपने जीवन के अनेक अमूल्य वर्ष देश की सेवा में बिताए.

अनेक वर्षो तक विदेशी शासकों ने उन्हें जेल में बंद रखा. उन्होंने साहस नहीं छौडा और देशवाशियो को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे. पंडित नेहरु बच्चो के प्रिय नेता थे. बच्चे उन्हें प्यार से चाचा नेहरु कहकर सम्बोधित करते थे.

उन्होंने देश में बच्चो के लिए शिक्षा सुविधाओं का विस्तार कराया. उनके अच्छे भविष्य के लिए अनेक यौजनाये आरम्भ की. वे कहा करते थे. कि आज के बच्चे ही कल के नागरिक बनेंगे. यदि आज उनकी अच्छी देखभाल की जायेगी तो आगे आने वाले समय में वे अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर, सैनिक, विद्वान, लेखक और वैज्ञानिक बनेगें. इसी कारण उन्होंने बाल कल्याण की अनेक योजनाये बनाई.

अनेक नगरो में बालधर और मनोरंजन केंद्र बनवाए. प्रतिवर्ष बाल दिवस पर डाक टिकिट का प्रचलन किया. बालकों के लिए अनेक प्रतियोगिताये आरम्भ कराई. वे देश विदेश में जहाँ भी जाते बच्चे उन्हें घेर लेते थे. उनके जन्मदिवस को भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष बाल दिवस के अवसर पर बाल मेले का आयोजन किया जाता है. बच्चे अपनी छोटी-छोटी दुकाने लगाते है. विभिन्न प्रकार की विक्रयता योग्य वस्तुए अपने हाथ से तैयार करते है. बच्चो के माता पिता और मित्र उस अवसर पर खरीददारी करते है. सारे विद्यालय को अच्छी प्रकार सजाया जाता है. विद्यालय को झंडियो, चित्रों और रंगों की सहायता से आकर्षक रूप दिया जाता है.

बाल दिवस के अवसर पर खेल कूद प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. बच्चे मंच पर आकर नाटक, गीत, कविता, नृत्य और फैंसी ड्रेस शो का प्रदर्शन करते है. सहगान, बासुरी वादन का कार्यक्रम दर्शकों का मन मोह लेता है. तत्पश्चात सफल और अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओ को पुरस्कार वितरण किये जाते है. बच्चो को मिठाई का भी वितरण किया जाता है. इस प्रकार दिवस विद्यालय का एक प्रमुख बन जाता है.

2. महात्मा गांधी निबंध | Essay on Mahatma Gandhi

समय-समय पर भारत में महान आत्माओं ने जन्म लिया है. गौतम बुद्ध, महावीर, अशोक, नामक, नामदेव, कबीर जैसे महान त्यागी और आध्यात्मिक पुरुषों के कारण ही भारत भूमि संत महात्माओं का देश कहलाती है. ऐसे ही महान व्यक्तियों के परम्परा में महात्मा गांधी ने भारत में जन्म लिया. सत्य, अहिंसा और मानवता के इस पुजारी ने न केवल धार्मिक क्षेत्र में ही हम भारत वासियों का नेतृत्व किया, बल्कि राजनीति को भी प्रभावित किया. सदियों से परतंत्र भारत माता के बन्धनों को काट गिराया. आज महात्मा गांधी के प्रयत्नों से हम भारतवासी स्वतंत्रता की खुली वायु में साँस ले रहे है.

राष्ट्रपति महात्मा गांधी का जन्म पोरबंदर में दो अक्टूबर 1869 को हुआ था. उनके पिता राजकोट के दीवान थे. इनका बचपन का नाम मोहनदास था. इन पर बचपन से ही आदर्श माता और सिन्धांतवादी पिता का पूरा-पूरा प्रभाव पड़ा.

गांधीजी ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा राजकोट में प्राप्त की 13 वर्ष की अल्पआयु में ही इनका विवाह हो गया था. इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा था. मेट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद में वकालत की शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड चले गए. वह तीन वर्ष तक इंग्लैंड में रहे. वकालत पास करने के बाद वे भारत वापस आ गए. वे आरम्भ से ही सत्य में विश्वास रखते थे.

भारत में वकालत करते हुए अभी थोडा ही समय हुआ था कि उन्हें एक भारतीय व्यापारी द्वारा दक्षिण अफ्रीका बुलाया गया. वहाँ उन्होंने भारतीयों की अत्यंत शोचनीय दशा देखी. गांधी जी ने भारतवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष आरम्भ कर दिया. दक्षिण अफ्रीका से लौटकर गांधी जी ने अहिंसात्मक तरीके से भारतीयों के अधिकारों के लिए लड़ने का निश्चय किया.

उस समय भारत के तिलक, गोखले, लाला लाजपतराय आदि नेता कांग्रेस पार्टी के माध्यम से आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे. गांधी जी पर उनका अत्यधिक प्रभाव पड़ा.

1921 में गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन चलाया. गांधी जी धीरे-धीरे सम्पूर्ण भारत में प्रशिद्ध हो गये. अंग्रेजी सरकार ने आन्दोलन को दबाने का प्रयास किया. भारतवासियों पर तरह-तरह के अत्याचार किये. गांधी जी ने 1930 में भारत छोड़ों आन्दोलन चलाये. भारत के सभी नर नारी उनकी एक आवाज पर उनके साथ बलिदान देने के लिए तैयार थे.

गांधीजी को अंग्रेजों ने बहुत बार जेल में बंद किया. गांधीजी ने अछुतौद्धार के लिए कार्य किया. स्त्री शिक्षा और राष्ट्र भाषा हिंदी का प्रचार किया. हरिजनों के उत्थान के लिए काम किया. स्वदेशी आन्दोलन चलाया. गांधी जी के प्रयत्नों से भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ. सत्य अहिंसा और मानवता के इस पुजारी की तीस जनवरी उन्नीस सौ अडतालीस को नाथू राम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी. इससे सारा विश्व विकल हो उठा.

3. विद्यालय वार्षिकोत्सव निबंध | School Anniversary Essay

विद्यालय वार्षिकोत्सव निबंध

विद्यालय वार्षिकोत्सव अन्य वार्षिकोत्सव के समान ही व्यापक स्तर पर होता है. यह उत्सव प्रतिवर्ष एक निश्चित समय पर ही होता है. इसके लिए सभी विद्यार्थी के ही सदस्य नही अपितु इससे सम्बन्धित सभी सामाजिक प्राणी भी तैयार रहते है.

हमारे विद्यालय वार्षिकोत्सव प्रतिवर्ष 13 अप्रैल की बैसाखी के शुभावसर पर होता है. इसके लिए लगभग पन्द्रह दिनों से ही तैयारी शुरू हो जाती है. हमारे कक्षाध्यापक इसके लिए काफी प्रयास किया करते है. वे प्रतिदिन की होने वाली तैयारी और आगामी तैयारी के विषय में सूचनापट्ट पर

लिख देते है. हमारे कक्षाध्यापक विद्यालय के वार्षिकोत्सव के लिए नाटक, निबंध, एकांकी, कविता, वाद विवाद खेल आदि के लिए प्रमुख और योग्य विद्यार्थियों के चुनाव कर लेते है. कई दिनों के अभ्यास के उपरान्त वे योग्य और कुशल विद्यार्थियों का चुनाव कर लेते है. इस चुनाव के बाद वे पुनः छात्रों को बार-बार उनके प्रदन्त कार्यो का अभ्यास कराते रहते है.

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी हमारे विद्यालय के वार्षिकोत्सव के विषय में प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित हो गया. इससे पूर्व विद्यालय के निकटवर्ती सदस्यों को इस विषय में सूचित करते हुए उन्हें आमंत्रित कर दिया गया.

प्रदेश के शिक्षा मंत्री को प्रमुख अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया. जिलाधिकारी को सभा का अध्यक्ष बनाया गया. विद्यालय के प्रधानाचार्य को अतिथि स्वागताध्यक्ष  का पदभार दिया गया. हमारे कक्षाध्यापक को सभा का संचालक पद दिया गया.

विद्यालय के सभी छात्रों, अध्यापकों और सदस्यों को विद्यालय की पूरी साज सज्जा और तैयारी के लिए नियुक्त किया गया. इस प्रकार के विद्यालय के वार्षिकोत्सव की तैयारी में कोई त्रुटी नही रहने पर इसकी पूरी सतर्कता रखी गई.

विद्यालय के वार्षिकोत्सव के दिन अर्थात 13 अप्रैल बैशाखी के शुभ अवसर पर प्रातः सात बजे से ही विद्यालय की साज-सज्जा और तैयारी होने लगती है. आठ बजते ही सभी छात्र, अध्यापक और सदस्य अपने-अपने सौपें हुए दायित्वों को सम्भालने लगते है.

अतिथियों का आना जाना शुरू हो गया. वे एक निश्चित सजे हुए तौरण द्वार से प्रवेश करके पंक्तिबद्ध कुर्सियों पर जाकर बैठने लगे थे. उन्हें सप्रेम बैठाया जाता था. कार्यक्रम के लिए एक बहुत बड़ा मंच बनाया गया था.

वहां कई कुर्सियों और टेबल अलग-अलग श्रेणी के थे. लाउड स्पीकर के द्वारा कार्यक्रम के सम्बन्ध में बार-बार सूचना दी जा रही थी.

ठीक दस बजे हमारे मुख्य अतिथि प्रदेश के शिक्षा मंत्री, सभाध्यक्ष जिलाधिकारी और उनके संरक्षकों की हमारे स्वागतध्यक्ष प्रधानाचार्य ने बड़े ही प्रेम के साथ आवभगत की और उन्हें उचित आसन प्रदान किया.

हमारे कक्षाध्यापक ने सभा का संचालन करते हुए विद्यालय से कार्यक्रम सम्बन्धित सूचना दी. इसके उपरान्त प्रमुख अतिथि शिक्षा मंत्री से वक्तव्य देने के लिए आग्रह किया. प्रमुख अतिथि के रूप में माननीय शिक्षामंत्री ने सबके प्रति उचित आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला. विद्यार्थियों को उचित दिशाबोध देखर विद्यालय के एक निश्चित अनुदान की घोषणा की जिसे सुनकर तालियों की गडगडाहट से सारा वातावरण गूंज उठा. इसके बाद संचालक महोदय के आग्रह पर सभाध्यक्ष जिलाधिकारी ने संक्षिप्त वक्तव्य दिया.

फिर संचालक महोदय के आग्रह पर स्वागताध्यक्ष हमारे प्रधानाचार्य ने सबके प्रति आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय की प्रगति का विस्तार से उल्लेख किया. बाद में संचालक महोदय ने मुख्य अतिथि से आग्रह करके पुरस्कार के घोषित छात्रों को पुरस्कृत करवाया अंत में सबको धन्यवाद दिया. सबसे अंत में मिष्ठान वितरण हुआ. दुसरे दिन सभी दैनिक समाचार पत्रों में हमारे विद्यालय के वार्षिकोत्सव का महत्व प्रकाशित हुआ जिसे हम सबने ही नही प्राय: सभी अभिभावकों, संरक्षको ने गर्व का अनुभव किया.

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